तुम्हारे बिन जीना है //गीत

दुष्यंत कुमार पटेल

रचनाकार- दुष्यंत कुमार पटेल "चित्रांश"

विधा- गीत

तुम्हारे बिन जीना है पल-पल मुश्किल
बस तुम्हीं पे फीदा है मेरा दिल

तस्वीर बन बसी हो निगाहों में तुम
वो जानाँ मेरे हर साँसो में तुम
तू तकदीर है,तू दिल के अरमा
मेरे इन हाथो की लकीरों में तुम
तुम्हारे बिन जीना….

तुम्हीं से हर खुशी है तुम्हीं से आशिकी
मैं ठहरा सागर हूँ तू बहती नदी है
होले-होले आ तू मेरे दिल के करीब
आके मुझे मिल इंतज़ार हर घड़ी है
तुम्हारे बिन जीना है ….

देख रुमानी शाम बहार तू याद आती है
कोयल भी कू-कू करके पास तुम्हें बुलाती है
तेरी हुस्न की दीदार कर चेहरा खिल जाता है
तुझे बाहों में भर के ही मुझे चैन आता है
तुम्हारे बिन जीना है ….

तेरी चाहत की खुश्बू घुली है इन बयार में
न कर देर कहीं टूट न जाए तेरे प्यार में
दिल के दरवाज़ा मेरे लिये एक बार खोल
देख तेरे द्वार आया मैं बनके कान्हा चोर
तुम्हारे बिन जीना है….

कवि:- दुष्यंत कुमार पटेल"चित्रांश"

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 47
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
दुष्यंत कुमार पटेल
Posts 86
Total Views 3.5k
नाम- दुष्यंत कुमार पटेल उपनाम- चित्रांश शिक्षा-बी.सी.ए. ,पी.जी.डी.सी.ए. एम.ए हिंदी साहित्य, आई.एम.एस.आई.डी-सी .एच.एन.ए Pursuing - बी.ए. , एम.सी.ए. लेखन - कविता,गीत,ग़ज़ल,हाइकु, मुक्तक आदि My personal blog visit This link hindisahityalok.blogspot.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia