तुम्हारे नवीन विचार

कमलेश यादव

रचनाकार- कमलेश यादव

विधा- कविता

तुम्हारे बारे में न सोचते हुए भी
सोचतीं हुँ,
तुम्हें अपने जीवन में चाहतीं हुँ
एक बार।

तुम्हारे नवीन विचारों में,
खो जाती हुँ,
और ख़ुद को,
भूल जाती हुँ बार-बार।

तुम्हारी प्रतिबद्ध निगाहों में,
खुला सत्य देखतीं हूँ,
सूरज का इतना उजाला कि,
मेरी आँखें बंद होने लगती है।

फिर भी यही उजास
मेरी बेचैनी को,
कम करती है हर बार।

तुम्हारे नवीन विचार मेरी
अकुलाहट को कम करतीं है
और मेरी जड़ता हार जाती है
फिर एक बार।।

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कमलेश यादव
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जन्म:- लोरमी,छत्तीसगढ़(भारत) शिक्षा- नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नॉलजी रायपुर, छत्तीसगढ़ से कम्प्यूटर टेक्नॉलजी में स्नातकोत्तर। सम्राट अशोक टेक्नॉलजी कॉलेज विदिशा (म प्र) से कम्प्यूटर साइंस में स्नातक। स्थान- न्यूयॉर्क, यूएसए कार्यक्षेत्र- ९ वर्ष तक कालेज अध्यापन अब स्वतंत्र लेखन। ब्लाग लेखन। गीत, गजल, दोहे, सवैया, हाइकु,छंदमुक्त, कहानी और व्यंग्य विधाओं में सक्रिय। कृतियाँ- कविता संग्रह- अब मैं मन का करतीं हुँ चलो फिर एक बार कुछ बचा है हमारे बीच दिन

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