तुम्हारे खत……. कविता कमंडल काव्य संग्रह से मेरी दूसरी रचना

Shikha Shyam Rana

रचनाकार- Shikha Shyam Rana

विधा- कविता

एक दिन
तुम्हारे लिखे
वो सारे खत
सार्वजनिक कर
लाऊंगी दुनिया के सामने
उस दिन पता चल जायेगा
तुम्हारे उन अपनों को
जिन्हें लगता है आज
कि हम ढोह रहे है अपने रिश्ते को
कितना प्यार है
हमारी रिश्तों की जड़ों में
जो हमे एक दूसरे से
दूर
होने ही नही देता
तुम्हारी खुशबू से सरोबोर
आज भी
खोलती हूँ जब कभी तुम्हारे खत
तो वो मुझे अंदर तक भीगो जाते है
और तुम्हारे गहरे प्यार का अहसास
बरस पड़ता है मुझ पर
सावन की पहली फुहार सा
न जाने वो कैसा वक़्त था
जब घटाएं छाती थी आसमान पर
मन तुम से दूरी होने का
शोक मनाता उदास हो उठता था
तुम कभी तेज़ तूफान में
आ कर खड़े हो जाते थे
मेरे कमरे की खिड़की से नजर आते
उस आम के पेड़ के नीचे
दूर ….
हम निहारा करते
एक दूसरे को घंटो
तुम भीगते रहते बारीश मे
और मे भीगती रहती तुम्हारे कोमल प्यार मे
न जाने वो कौन सा वक़्त था
जब तुम मेरे लिए पत्थर हो गये
पर मैं जानती हूँ
जो अंगारे बरसते है आज
शब्द बन कर
उन के नीचे
तलहटी में कही
एक नदी बहती है
जो तुम कहते नही
वो मुझ से छुपा कर रखी
तुम्हारी डायरी बताती है
जिस का हर पन्ना
मेरे नाम लिखा एक खत है
तभी तो कहती हूँ
किसी दिन तुम्हारी नज़र बचा
सार्वजनिक कर दूंगी
तुम्हारे प्रेम में भीगे खत
उस दिन तुम अपनी भावनाओं का बांध
बचा पाये तो कहना

शिखा श्याम राणा
पंचकूला हरियाणा॥

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Shikha Shyam Rana
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हिंदी कविता कहानियाँ लिखने का जनून की हद तक शौक तो है मगर अभी छात्रा हूँ इस क्षेत्र में। जॉब और शौक एक ही, हरियाणा ग्रंथ अकादमी में कार्यरत।

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