तुमसे बिछड़ के दिल को ठिकाना नहीं मिला

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गज़ल/गीतिका

तुमसे बिछड़ के दिल को ठिकाना नहीं मिला
तुम सा कहीं भी हमको दीवाना नहीं मिला

सपनें रहे अधूरे गिला ये रहा हमें
वो चाहतों का तुमसे खज़ाना नहीं मिला

कुछ याद ही कहाँ हैं सनम प्यार में हमें
तुमको भुला सकें वो बहाना नहीं मिला

ऐसी तरंग छेड़े ,न फिर होश ही रहे
मनमीत का मधुर वो तराना नहीं मिला

हो एक घर हमारा भी ख्वाहिश यही रही
ढूंढा यहाँ मगर वो घराना नहीं मिला

इक बार दिल तुम्हारे गए बस तो फिर हमें
सारे जहाँ में ऐसा ठिकाना नहीं मिला

पल जी लिए वही जो चले साथ अर्चना
फिर बाद में सफर वो सुहाना नहीं मिला

डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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12 comments
  1. तुमसे बिछड़ के दिल को ठिकाना नहीं मिला
    तुम सा कहीं भी हमको दीवाना नहीं मिला

    मुक्मल