” तुमने फिर , डाला है डेरा ” !

Bhagwati prasad Vyas

रचनाकार- Bhagwati prasad Vyas " neerad "

विधा- गीत

बढ़ता हुआ कारवां ,
थम सा गया है !
रेत के टीलों से बाहर ,
मन यहाँ है !
छूटा घर –
द्वार देहरी ,
अब पराया है सवेरा !

झिलमिलाते दीप दो ,
रोशन हुए हैं !
हमराही राह चलते ,
थक से गये हैं !
ओट घूँघट –
खोलते पट ,
मुदित सा मन लगे तेरा !

रूप यौवन लादकर ,
आगे बढ़ी हो !
बदले हुए से अर्थ ,
पहचाने खड़ी हो !
डेरे डेरे –
दे के फेरे ,
थका सा समय लुटेरा !

बृज व्यास

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Bhagwati prasad Vyas
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एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद साझा काव्य संग्रह प्रकाशित ! e काव्यसंग्रह "कहीं धूप कहीं छाँव" एवं "दस्तक समय की " प्रकाशित !

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