तुझे किस नाम से पुकारूं

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- कविता

भोलेनाथ को समर्पित
(शिव जी के 51 नाम सहित कविता )

भोलेनाथ ओ शंकर त्रिपुरारी,
ओ त्रिपुरारी – – – –
शर्व तेरी है महिमा बड़ी न्यारी।
बेलपत्र आक धतूरा दुग्ध चढ़ाऐं।
श्रावण मास में तेरी महिमा गाऐं।
तुझे शत शत नमन नीलकंठ,
ओ नीलकंठ – – – – –
तेरा जाप करता है हर कंठ।
कहलाते हो नटराज और महेश्वर,
शंभू तुम्हीं हो सारे जग के ईश्वर।
हो भगवन तुम ही जगद्व्यापी,
ओ जगद्व्यापी——-
तेरी करुणा है शेखर सर्वव्यापी।
जटा में गंगा बसती ओ गंगाधर,
शीश पर चन्द्र धारे ओ शशिधर।
पर्वत वासी हो तुम कैलाश पति,
ओ कैलाश पति——
गिरिप्रिय तुम हो तुम ही उमापति।
विश्वेश्वर हो तुम ही श्री कंठ तुम,
त्रिलोकेश हर लेते जग का तम।
श्री कंठ हो तुम शूलपाणी,
ओ शूलपाणी ——-
तेरा जयकारा करे हर प्राणी।
वृषभारूढ़ तुम रहते हो अनीश्वर,
ओ अम्बिका नाथ तुम हे परमेश्वर।
सूक्ष्म तनु तुम हो हे मृत्युंजय,
ओ मृत्युंजय ——-
शिव के भक्त पाए सब दुखों पर जय।
जय महाकालेश्वर, जय ओंकारेश्वर,
जय अम्लेश्वर, जय भीमेश्वर।
जय हो तेरी हे प्रभु जगन्नाथ,
ओ जगन्नाथ ——-
दरस को तेरे हम तरसे वैद्यनाथ।
जय अमर नाथ जी, जय केदारनाथ जी,
जय सोमनाथ जी, जय विश्व नाथ जी।
रुद्र तुम ही हो, तुम्हीं हो शाश्वत,
ओ शाश्वत ——–
सारे कष्टों से कर दो हमें निवृत्त।
जय हो घुश्मेश्वर, जय हो रामेश्वर,
जय भुजंगाभूषण, जय अर्धनारीश्वर।
ओ त्रयंबक, ओ भगवन अंबरीष,
ओ अंबरीष——-
दे दे हम भक्तों को अपना आशीष।
तेरी दिव्यदृष्टि ओ प्रलयंकर,
दुष्टों को देती दंड भयंकर
हुत हो तुम ही, तुम ही सुरेश,
ओ सुरेश ——–
सन्यासी का रचा है तूने वेश।
भक्ति के वश में तुम ओ भोले देवा,
भोग भांग चढ़े, न चढ़े कोई मेवा।
बैठे पर्वत पर देव आशुतोष
आशुतोष ———
तन पर भभूत और मन में है संतोष।
तुम ललाटाक्ष हो, सब तुम्हें दिखता,
झूठ सच कुछ न, तुमसे है छिपता।
अंतर्यामी हो, भगवन नीललोहित
ओ नीललोहित——-
सदाशिव करें भक्तों का सदा सुख और हित।
जन- जन का दुख हरते ओ सर्वज्ञ,
पुत्रों के कष्टों से नहीं हो तुम अनभिज्ञ।
जय हो त्रिलोचन, जय भोले भंडारी,
ओ भोले भंडारी ——-
भव सागर से कर दे नैया पार हमारी।

—रंजना माथुर दिनांक 21/07/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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