==== तुझे अर्पण ====

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- गीत

सुर हैं मेरे पर गीत तेरे हैं
सुर हैं मेरे पर गीत तेरे हैं
भगवन आप ही मीत मेरे हैं।

वाणी ये मेरी गुन तेरे ही गाये सदा
इक इक सांस पे तेरे प्रेम का कर्ज लदा।
ओ प्रभु प्यारे तुम ही मीत हमारे
सुर हैं मेरे – – – – – – –

तेरा ये आशीष दाता काफ़ी है मेरे लिए
सदा जीऊं मैं प्रभु सब के भले के लिए
ओ प्रभु प्यारे तुम ही मीत हमारे
सुर हैं मेरे – – – – – – –

सुबह शाम गाऊँ मैं तेरी ही महिमा
कैसै जताऊं नाथ मैं तेरी गरिमा
ओ प्रभु प्यारे तुम ही मीत हमारे
सुर हैं मेरे – – – – – – –

—-रंजना माथुर दिनांक 04/07/2017
(मेरी स्व रचित व मौलिक रचना)
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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