**** तिलिस्म जिंदगी का। ****

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- मुक्तक

************************

तिलिस्म जिंदगी का भी कितना अजीब है

कैच जिंदगी को करने मौत बाउंड्री पर खड़ी है

जिंदगी और मौत के दरमियां इतना फासला है

जैसे कब्बडी में लाईन छूते ही मौत से
जिंदगी है ।।

👍मधुप बैरागी

Views 8
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
भूरचन्द जयपाल
Posts 312
Total Views 5.1k
मैं भूरचन्द जयपाल वर्तमान पद - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिन्दी रचनाये 9928752150

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia