” तिरंगे में लिपटी जवानी कहाँ है “

Kavi DrPatel

रचनाकार- Kavi DrPatel

विधा- गज़ल/गीतिका

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दुआ बन्दगी की निशानी कहाँ है ।
मरा आँख में आज पानी कहाँ है ।

सिसकती मेरे देश की आज सरहद ।
बता और कीमत चुकानी कहाँ है ।

हरिश्चंद जैसे कहाँ सत्यवादी ।
कहाँ अब वो राजा वो रानी कहाँ है ।

मुझे जो यहाँ पर कशिश खींच लायी ।
मैं आवाज देता दिवानी कहाँ है ।

मेरा दिल चुराया तो लौटा उसे दो ।
मेहरबान थे मेहरबानी कहाँ है ।

दुआ मुझको देती जुदाई को सहकर ।
वफ़ा की वो कसमें निभानी कहाँ है ।

पिला दो हमे आज नजरों से साकी ।
बहुत ब्रांड बदले पुरानी कहाँ है ।

निशानी लगाकर के सीने से रक्खी ।
बढ़ा हाथ कह दे पिन्हानी कहाँ है ।

बसा बीच सरहद पे लें आशियाँ हम ।
बता दूरियां अब मिटानी कहाँ है ।

चला वीर हूँ आज सबसे जुदा हो ।
तिरंगे में लिपटी जवानी कहाँ है ।
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वीर पटेल

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मैं कवि डॉ. वीर पटेल नगर पंचायत ऊगू जनपद उन्नाव (उ.प्र.) स्वतन्त्र लेखन हिंदी कविता ,गीत , दोहे , छंद, मुक्तक ,गजल , द्वारा सामाजिक व ऐतिहासिक भावपूर्ण सृजन से समाज में जन जागरण करना

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