तिरंगा

guru saxena

रचनाकार- guru saxena

विधा- कविता

तिरंगा आपस में मतभेद विचारों का देते विरोधी बयान तिरंगा
सत्ता में कोई तो कोई विपक्ष में है सबका स्थान तिरंगा
खूब लड़ें-झगड़ें पद पाने को युद्ध चुनाव समान तिरंगा
वक्त पै तेरे लिए सब एक हैं है सबको यह ज्ञान तिरंगा

धर्म में जाति में भाषा में भिन्नता भिन्न दुकान मकान तिरंगा
रीति रिवाजों में साज समाजों में भिन्न प्रथाओं की खान तिरंगा
मंदिर मस्जिद वा गुरुद्वारा है भिन्न सभी के निशान तिरंगा
तेरे लिए कोई भिन्न नहीं सर्वस्व करें कुर्बान तिरंगा

केसरिया कश्मीर सा ऊपर भक्ति का रंग प्रधान तिरंगा
शांति का रंग सफेद है बीच में चक्र अशोक निशान तिरंगा
नीचे हरा रंग केरल सा करता समृद्धि बखान तिरंगा
देख तुझे लगे झंडा नहीं है तू पूरा है हिंदुस्तान तिरंगा

चक्र चौबीस रेखाएं खिंची यह जैन समाज का सार तिरंगा
नीले स्वरूप में ऐसा लगे श्रीकृष्ण हुए हैं साकार तिरंगा
ऐसी जुड़ी हैं चौबीसों सभी सबका सद्भाव में प्यार तिरंगा
अंक चौबीस बताता कि ये विष्णु के सभी अवतार तिरंगा

रंग सफेद खुली हुई बाइबिल दे रही सेवा का ग्यान तिरंगा
धर्म के रेखाओं में है रेखांकित चौबीस ग्रंथ समान तिरंगा
वेद पुराण वा है गुरूग्रंथ लगाए अजान कुरान तिरंगा
मैं मतिमंद कहां कर पाऊं तेरी महिमा का बखान तिरंगा

एक ही डोर में रंग बंधे सब एक सभी का विधान तिरंगा
रंगों से डोर वा डोर से डंडा है जो सबसे बलवान तिरंगा
ताकत है मजबूत तभी सबके चेहरे मुस्कान तिरंगा
तेरे लिए हर वक्त तैयार है युद्ध का साजो सामान तिरंगा

शांति भरा सद्भाव भरा भरा साहस सिंधु समान तिरंगा
तेरे पर क्यों ना करें अभिमान तू है सबका स्वाभिमान तिरंगा
सांड कवि कहें अंतिम सांस लो गाऊँ तेरे यश गान तिरंगा
रोके से भी ना रुकूंगा कभी फिर चाहे चली जाए जान तिरंगा।।

गुरू सक्सेना, नरसिंहपुर

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