तितली की झुंड मेरे मन को लुभा गई

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- गज़ल/गीतिका

मौसम बसंती आया हरियाली छा गई
दुलहन बनी जमीं है सिंगार पा गई

ठूंठे सभी शज़र थे बीमार जैसे थे
चेहरा खिला खिला है रौनक़ सी आ गई

अब वो कली हमल में पर्दा नसीं थी जो
कुदरत ने हाथ फेरा जान उसमे आ गई

होकर सयानी वो कली मदमस्त हो गई
भौंरे दिवाने कहते क़यामत है ढा गई

नग्में सुना रही है कोयल भी मस्ती में
तितली की झुंड मेरे मन को लुभा गई

छाई बहार हर सूं बहका हुआ समां
,"प्रीतम" सभी दिलों में खुशहाली आ गई

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Pritam Rathaur
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मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

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