तलाक की नौबत न आने दीजिये

कृष्ण मलिक अम्बाला

रचनाकार- कृष्ण मलिक अम्बाला

विधा- कविता

तलाक लफ्ज ही है दर्दनाक
बस इतना जान लीजिए
विनती है दुनिया वालों तुमसे
तलाक की नौबत न आने दीजिये ।

ढाई दिन की है जिंदगी
एक दूसरे पर वार दीजिये
आएं भूचाल जो जिंदगी में
हंस खेल के गुजार दीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे,,,,,,

केवल सुख ही सुख हो हर पल
ऐसा कभी होता ही नहीं
ऐसा चाहते अगर माँ बाप तुम्हारे भी
तो तुम्हारा भी जन्म होता नहीं
लड़ना झगड़ना तो है बेहतरीन पल जिंदगी के
बस इतना ही विचार लीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे,,,,,,,,

मन में हो शक का भार अगर
जल्दी से साथी से हल्का कर लीजिए
मन ही मन पानी देकर इसे
और न कड़वा ये विष कीजिये
होता है अक्सर शक से विनाश देखा मैंने
इसे दूर कर जिंदगी सँवार लीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे ,,,,,,,,

मित्र होते है करीबी , जीवन साथी तुम्हारे
चाहे नजरें पूरा संसार घुमा लीजिये
पग पग साथ की पड़ती है जरूरत उनकी
इतना जरूर समझ लीजिए
टूट जाते हैं मोती दिल की माला के बिछुड़कर
साथ यूँ न आसानी से छूटने दीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे,,,,,,,,,,

बच्चों के मात पिता जब बिछड़ने की सोचना
उनका क्या होगा भविष्य , ये भी तो देखना
माँ बाप की कमी को उम्र भर तरसते वो
कौन सुनेगा तुम्हारे बाद ,उनके तन्हा दर्द की वेदना
बिन माँ बाप खाते हैं ठोकरे बच्चे उम्र भर
ये तस्वीर मन में खींच लीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे,,,,,,,,,

सास को माँ और माँ को सास
जो समझे शादी के बाद
समझना उसकी जिंदगी में आनंद ही आनंद
मिलता रहेगा परमपिता का आशीर्वाद
पत्नी को समझे जो लक्ष्मी अपने घर की
शक का करता रहे हर पल विनाश
उसकी संवर गयी रे जिंदगी
हुआ उस घर में जो राम राज
बन्द कमरे की गलतफहमियां
कमरे में ही सुलझा लीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे,,,,,,

रिश्ता जोड़ने से पहले एक सावधानी
बड़े बुजुर्ग आज के समय में जान लीजिए
जानें एक दूसरे को वो पहले
2 से 3 बार उन्हें बेशक मिलने दीजिये
विचारों के तालमेल है जरूरत आज की
यही न मिलना है दीवार आज की
इस दीवार को न शुरू से ही पनपने दीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे,,,

लड़की के परिजन आज के समझे अगर इस बात को
न झांकिए शादी के बात बिलकुल भी , बेटी के परिवार को
न उजड़ेगी बेटी की जिंदगी कभी
बेशक हजार बार आजमा लीजिये
कभी भी गलती से बेटी को ,
ससुराल के मामले में
बेवजह न अपनी राय दीजिये
हो सके तो जितना भी अगर तुमसे
बेटी से दुश्मनी कर लीजिए
सीख जायेगी खुद बेखुद लड़खड़ाकर
वो जीना आख़िरकार
उसे अपने दम पर जीने का
मौका तो दीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे,,,

एक का कहना , दूसरे ने सहना
ससुराल का रहना , मायके न कहना
ये दोहा जिंदगी में उतार लीजिये
हसीन होगी जिंदगी तुम्हारी
जो इन बातों को विचार लीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे ,,,,

पवित्र रिश्ता निभाओ अपनी सूझबूझ से हरदम
जीवन साथी तुम , दिया और बाती तुम
मांग चमकाकर सजना की हर पल बहना
कभी न ये सूरज ढलने दीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे
तलाक लफ्ज को खुद से कोसों दूर कीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे
तलाक की नौबत न आने दीजिये,,,,,,,,,

आज की हर युवा पीढ़ी को समर्पित,,,,,,,,,,,

Sponsored
Views 36
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
कृष्ण मलिक अम्बाला
Posts 41
Total Views 11.8k
कृष्ण मलिक अम्बाला हरियाणा एवं कवि एवं शायर एवं भावी लेखक आनंदित एवं जागृत करने में प्रयासरत | 14 वर्ष की उम्र से ही लेखन का कार्य शुरू कर दिया | बचपन में हिंदी की अध्यापिका के ये कहने पर कि तुम भी कवि बन सकते हो , कविताओं के मैदान में कूद गये | अब तक आनन्द रस एवं जन जागृति की लगभग 200 रचनाएँ रच डाली हैं | पेशे से अध्यापक एवं ऑटोमोबाइल इंजिनियर हैं |

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia