तरुण वह जो भाल पर लिख दे विजय|

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- मुक्तक

तरुण वह जो भाल पर लिख दे विजय |
शरम से आँखें झुकाता है प्रलय |
जाग, सद्नायक बने औ बना दे|
राष्ट्र-तम पर अरुण-आभा का निलय|

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

वर्ष 2013 में प्रकाशित मेरी(बृजेश कुमार नायक की) कृति "जागा हिंदुस्तान चाहिए" का मुक्तक
Brijesh Nayak
15-04-2017

उक्त मुक्तक मेरे फेसबुक पेज "Brijesh Nayak की रचनाएं" में भी पढा जा सकता है |

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376व्हाट्सआप-9956928367 एवं8787045243

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