तबाही का मंजर

sunil soni

रचनाकार- sunil soni

विधा- कविता

हैराँ है धरती परेशां है अम्बर
बतला रहा है तबाही का मंजर ।
पापों की गर्मी से कांपे ये धरती
विष की घटा से ढँका है ये अम्बर ।।

किसी की हो करनी किसी को हो भरनी
बतला ही देता तबाही का मंजर ।
पछताओगे क्या ?अपने किये पर
अब खुद के ही सीने में खुद का है खंजर ।।

मानो भी सच को न मानोगे कब तक
झुठी ये दुनियां झूठा बबंडर ।
हम भी न होंगें तुम भी न होंगे
बनाते रहे गर हम धरती को बंजर ।।

हमारी हो श्र्द्धा हम विश्वास उनका
देखा है जिनने तबाही का मंजर ।
मानो न मानो तुम्हारी ख़ुशी है
देखेंगे हम भी तबाही का मंजर ।।

Views 130
Sponsored
Author
sunil soni
Posts 12
Total Views 1.1k
जिला नरसिहपुर मध्यप्रदेश के चीचली कस्बे के निवासी नजदीकी ग्राम chhenaakachhaar में शासकीय स्कूल में aadyapak के पद पर कार्यरत । मोबाइल ~9981272637
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia