” तन हुआ बंसुरिया ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

रचनाकार- भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

विधा- गीत

प्रियतम का स्पर्श पा ,
मानो धन्य हुई |
छुअन की अनुभूति में ,
डूबी-मगन हुई |
चमक गई मन के अंधियारे –
ज्यों बिजुरिया ||

अधरों की छुअन मीठी ,
धडकनों में द्वन्द |
रोम रोम व्याप्त मौन ,
पलकें हुई बंद |
बदरी सी बरसी खुशियाँ –
अपनी डगरिया ||

सब टूट गये तटबंध यों ,
बहका सरित प्रवाह |
सागर से मिलने की ,
बढ़ती गयी चाह |
खो जाऊं अस्तित्व अपना –
उठती लहरिया ||

हैं जगे सुर मदिर ऐसे ,
हो गयी निहाल |
तन मन ने सुध खो दी,
लज्जावनत ,बेहाल |
सब कसे हुए बंध ढीले –
कमसिन उमरिया ||

बृज व्यास

Sponsored
Views 121
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
भगवती प्रसाद व्यास
Posts 121
Total Views 29.1k
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद साझा काव्य संग्रह प्रकाशित ! e काव्यसंग्रह "कहीं धूप कहीं छाँव" एवं "दस्तक समय की " प्रकाशित !

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia