तन मन धन अर्पण करूं

Sharda Madra

रचनाकार- Sharda Madra

विधा- मुक्तक

तन मन धन अर्पण करूं, ध्याऊँ तुझे नित श्याम
चरणों की चेरी बनकर, करूं सेवा निष्काम
छ्ल- कपट लोभ प्रपंच से सदा रहूँ मैं दूर
बन वृन्दा निधिवन की मैं, बसूँ वृन्दावन धाम

Sponsored
Views 26
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Sharda Madra
Posts 53
Total Views 689
poet and story writer

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
One comment