तट की व्याकुलता

डॉ०प्रदीप कुमार

रचनाकार- डॉ०प्रदीप कुमार "दीप"

विधा- कविता

तट की व्याकुलता
————–

कभी व्यथित देखा है ?
नदी के तट को !
हाँ !!!
मैंने देखा है !
एक बार नहीं
कई बार !!
जब बाँधता है
सीमाओं में नदी को !
तो व्याकुल होता है तट ||
क्यों कि सीमाओं में बाँधना
प्रतिबंध है…….
सहजता पर !
स्वतंत्रता पर !
स्वभाव पर !
लेकिन फिर भी
बाँधता है……..
नदी को सीमाओं में ||
ताकि वह मर्यादित रहे
और हद में भी ||
यह सत्य है…..
और शाश्वत भी !
कि हदों पर बंदिश
सद्गुणी भी बनाती है |
बस ! ये सोचकर ही
व्याकुलता को…..
अनदेखा करता है तट ||
——————————–
— डॉ० प्रदीप कुमार "दीप"

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डॉ०प्रदीप कुमार
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नाम : डॉ०प्रदीप कुमार "दीप" जन्म तिथि : 02/08/1980 जन्म स्थान : ढ़ोसी ,खेतड़ी, झुन्झुनू, राजस्थान (भारत) शिक्षा : स्नात्तकोतर ,नेट ,सेट ,जे०आर०एफ०,पीएच०डी० (भूगोल ) सम्प्रति : ब्लॉक सहकारिता निरीक्षक ,सहकारिता विभाग ,राजस्थान सरकार | सम्प्राप्ति : शतक वीर सम्मान (2016-17) मंजिल ग्रुप साहित्यिक मंच ,नई दिल्ली (भारत) सम्पर्क सूत्र : 09461535077 E.mail : drojaswadeep@gmail.com

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