डिअर डेयरी से मेरी बात

pratik jangid

रचनाकार- pratik jangid

विधा- लेख

dear diary
में तुमको यह बताना चाहता की तुमको मेने बनाया ताकि में तुमसे बात कर सकु ! जो जी चाहे लिख सकता हु ! तुम मेरे best friend की तरह हो !और तुमको मेने नाम दिया" डिअर डायरी" !
डिअर डायरी में तुममे कभी किसी की ख़ुशी, तो कभी गम लिखूंगा कभी किसी कहानी का किस्सा लिखूंगा !

ये किस्सा मेरा भी सकता हे या किसी और का भी !कभी गज़ल कभी कविता लिखूंगा ! और हा कभी कुछ लिखते समय अगर मेरे आशु निकल क्र तुम्हारे बदन पर गिर जाये तो उसे तुम छुपा लेना किसी को कहना मत ! ये बात अपने तक ही रखना ! तुम बस मेरी इन कहानियो किस्सों को छुपकर रखना ! वरना ये किसी के हाथ लग गयी तो ! या चोरी हो गयी तो में किसी से अपनी बात कहूँगा ! तुम मेरे सबसे अछे मित्र हो .क्यों की तुम सिर्फ मेरी सुनते हो कभी अपनी कुछ नहीं सुनते ! मेरी भीगी आंखे के गिरते आशु भी तुम पीना सिख गए हो ! और एक बात तो में तुमको बताना ही भूल गया अपना एक मित्र और अपने बीच हे उससे भी तो मिलावा दू तुमको .जिसने तुम्हे लिखने में मेरा साथ दिया हे ! अरे ये "कलम" इसी के सहारे तो में तुम तक पहुचता हु इसे तुम सम्भाल कर रखना तुम्हरे पास ही इसे छोड़कर जाता हु में ! इसके बिना अपन सब अकेले रह जायेंगे ! इसे बिना अधुरे रह जायेंगे अपने न में तुमको कुछ बता सकूँगा और न कलम मेरा साथ !तुम समझ रहे होना दोनों में क्या कहना कह रहा हु ! तुमसे मिलना रोजाना तो नहीं होंगा लेकिन मिलता जरुर रहूँगा तुम से बहुत सारी बाते जो करनी हे ! चलो चलता हु में ! आता हु फिर ! by

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pratik jangid
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