ठीक है…

प्रतीक सिंह बापना

रचनाकार- प्रतीक सिंह बापना

विधा- लेख

ठीक है अगर आज तुम बहुत थक गए हो, इतना की कुछ भी ना कर सको. ठीक है अगर आज तुम सारे काम से, लोगों से दूर जाना चाहते हो. अपने दोस्तों से, परिवार से, अपने प्यार से, सबसे दूर. वो लोग जो तुम्हें समझते हैं, तुम्हारे इस बर्ताव को समझेंगे या मैं ये कहूं कि जिनके लिए तुम मायने रखते हो वो लोग. क्यूंकि अक्सर वही लोग साथ देते हैं जिनसे हम कोई उम्मीद नहीं रखते.

कुछ दिन, कुछ हफ़्तों का वक़्त लो, छुट्टियां लो और निकल जाओ कही यूँ ही. कोशिश करो वो सब ढूंढने की जो तुम सच में पाना चाहते हो. पेड़ों के नीचे आराम करो, सितारों की छायाँ में सो जाओ. कुछ समय के लिए सबसे दूर हो जाने का मतलब ये नहीं कि तुम हार मान चुके हो, बल्कि इसका मतलब ये है कि तुम लौटोगे, और बेहतर बनकर लौटोगे.

अपने घर से, दफ्तर से बाहर कदम बढ़ाकर देखो, शायद वो करिश्मा, वो जादू दिख जाये जिसकी तुम्हें तलाश है. लोगो को किताबों की तरह देखो, वो किताबें जो खुद अपनी कहानियां तुम्हें पढ़कर सुनाती हैं. अपनी कहानी दूसरों को पढ़कर सुनाओ. नयी जगहों को तलाशो, उन्हें अपनी यादो में बसा लो, और महसूस करो कि ये सब कितना सुन्दर है.

हमने खुद को बाँध रखा है. कभी भटक कर देखो, शायद वो मंज़िल मिल जाये जिसकी हमेशा तलाश थी. क्या पता जिस राह पर हम चल पड़ें हों, ये वही रास्ता हो जिस पर हम हमेशा चलना चाहते थे.

–प्रतीक

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प्रतीक सिंह बापना
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मैं उदयपुर, राजस्थान से एक नवोदित लेखक हूँ। मुझे हिंदी और अंग्रेजी में कविताएं लिखना पसंद है। मैं बिट्स पिलानी से स्नातकोत्तर हूँ और नॉएडा में एक निजी संसथान में कार्यरत हूँ।

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