ठानी है अगर किस्मत ने अंगारे बरसाने की

कृष्ण मलिक अम्बाला

रचनाकार- कृष्ण मलिक अम्बाला

विधा- शेर

अर्ज किया है
ठानी है अगर किस्मत ने अंगारे बरसाने की
ठानी है मैंने भी उसे फूल बनाने की
जब शमा न हो पायी परवाने की
तो मुझे क्यों हो परवाह जग के याराने की
कोई लाख कोशिश करे मुझे नजरों से गिराने की
ठानी है मैंने भी उसे अपना बनाने की

Sponsored
Views 88
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
कृष्ण मलिक अम्बाला
Posts 41
Total Views 11.9k
कृष्ण मलिक अम्बाला हरियाणा एवं कवि एवं शायर एवं भावी लेखक आनंदित एवं जागृत करने में प्रयासरत | 14 वर्ष की उम्र से ही लेखन का कार्य शुरू कर दिया | बचपन में हिंदी की अध्यापिका के ये कहने पर कि तुम भी कवि बन सकते हो , कविताओं के मैदान में कूद गये | अब तक आनन्द रस एवं जन जागृति की लगभग 200 रचनाएँ रच डाली हैं | पेशे से अध्यापक एवं ऑटोमोबाइल इंजिनियर हैं |

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia