ठानी है अगर किस्मत ने अंगारे बरसाने की

कृष्ण मलिक अम्बाला

रचनाकार- कृष्ण मलिक अम्बाला

विधा- शेर

अर्ज किया है
ठानी है अगर किस्मत ने अंगारे बरसाने की
ठानी है मैंने भी उसे फूल बनाने की
जब शमा न हो पायी परवाने की
तो मुझे क्यों हो परवाह जग के याराने की
कोई लाख कोशिश करे मुझे नजरों से गिराने की
ठानी है मैंने भी उसे अपना बनाने की

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कृष्ण मलिक अम्बाला
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कृष्ण मलिक अम्बाला हरियाणा एवं कवि एवं शायर एवं भावी लेखक आनंदित एवं जागृत करने में प्रयासरत | 14 वर्ष की उम्र से ही लेखन का कार्य शुरू कर दिया | बचपन में हिंदी की अध्यापिका के ये कहने पर कि तुम भी कवि बन सकते हो , कविताओं के मैदान में कूद गये | अब तक आनन्द रस एवं जन जागृति की लगभग 200 रचनाएँ रच डाली हैं | पेशे से अध्यापक एवं ऑटोमोबाइल इंजिनियर हैं |

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