ठगें सभी रिश्ते उसे

Rita Yadav

रचनाकार- Rita Yadav

विधा- दोहे

ठगें सभी रिश्ते उसे, ठगे उसे परिवार l
आज अकेले रो पड़ी, होकर वो लाचार ll

'रीता' वहांँ न जाइए, मिले जहांँ अपमान l
हर धन से होता बड़ा, है अपना सम्मान ll

बातें उनकी प्रिय लगें, उर में उनका वास l
कह दूंँ कैसे हे सखी, यह सुंदर अहसास ll

अंधभक्त बनना नहीं,कभी किसी का यार l
चल पड़ता इससे किसी, बाबा का व्यापार ll
कपटी, दंभी, लालची ,अपना करें बखान l
बातों से इनकी लगे, ये है बड़े महान ll

जिस घर में पूजें सभी, गौरी – पुत्र गणेश l
वास वहांँ आकर करें,ब्रह्मा विष्णु महेश ll

रीता यादव

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