ज्यों गगन में चान्द चमके…बेटी चमके आंगना में

अलका जैन

रचनाकार- अलका जैन

विधा- कविता

ज्यों गगन में चान्द चमके
बेटी चमके आंगना में

बेटिया साडी का आंचल
बेटिया आंखों का काजल
बेटिया चूडी की खन-खन
बेटिया मां का है दर्पण

बेटिया पूजा की थाली
बेटिया सबसे निराली
बेटिया आंगन की तुलसी
बेटिया डयोरी का दीपक

बेटिया मां – बाप का सम्मान है
बेटिया इस देश की शान है!
बेटियों को कोख में मत मार दो,
बेटियों को जीने का अधिकार दो!

लेखिका- अलका जैन, रानीपुर झांसी

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