ज्यों गगन में चान्द चमके…बेटी चमके आंगना में

अलका जैन

रचनाकार- अलका जैन

विधा- कविता

ज्यों गगन में चान्द चमके
बेटी चमके आंगना में

बेटिया साडी का आंचल
बेटिया आंखों का काजल
बेटिया चूडी की खन-खन
बेटिया मां का है दर्पण

बेटिया पूजा की थाली
बेटिया सबसे निराली
बेटिया आंगन की तुलसी
बेटिया डयोरी का दीपक

बेटिया मां – बाप का सम्मान है
बेटिया इस देश की शान है!
बेटियों को कोख में मत मार दो,
बेटियों को जीने का अधिकार दो!

लेखिका- अलका जैन, रानीपुर झांसी

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अलका जैन
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पूरा नाम - श्रीमती अलका जैन एक ग्रहणी .... शादी के बाद जिसका लेखन बंद हो गया था पर बेटी के लेखन को देख दुबारा कलम उठायी है ! पति का नाम - डॉ प्रमोद कुमार जैन पुत्री - जयति जैन ( नूतन/शानू ) पुत्र - पारस जैन (सनी ) पता - बस स्टैंड रानीपुर , जिला -झांसी उ.प्र .

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