ज्ञान /प्रेम

Brijesh Nayak

रचनाकार- Brijesh Nayak

विधा- दोहे

बाँँटे ज्ञान "बृजेश" नित, बन अशोक जयमाल |
कमियों पर चिंतन करे दिव्य पुरुष की चाल ||

आत्मा ही परब्रह्म है गूढ-सु ज्ञान बृजेश |
करम-भोज खा देव बन या फिर दनुज नरेश||

प्रेम , प्रेम है, मोह ना, और नहीं संबंध|
कह "बृजेश नायक" सुजन, प्रेम समत्व सुगंध||

बृजेश कुमार नायक

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Brijesh Nayak
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-नाम-बृजेश कुमार नायक -पता-सुभाष नगर कोंच उ.प्र.285205 -E mail-brijeshkumarnayak1961@gmail.com -मोः9455423376whats app-9956928367 -प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" काव्य संग्रह एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" खण्ड काव्य| (साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित) -सम्मान -अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत| -आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित
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