ज्ञान तू है प्राण तू है

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- कुण्डलिया

ज्ञान तू है प्राण तू है तू बिशुद्ध है आत्मा
है दिया ये ज्ञान सबको एक है परमात्मा

एक ही सागर के हैं हम बूंद सारे प्राणी भी
कष्ट सबका एक जैसा मत दुखाओ आत्मा

प्रबुद्ध शुद्ध विशाल हृदय करुणा है सबके लिए
प्रेम से जीता जगत को एक है तू महात्मा

आपका संदेश जन जन के हृदय को भा गया
करुणा की एक लौ जलाना घृणा का हो खात्मा

Sponsored
Views 6
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Pritam Rathaur
Posts 168
Total Views 1.7k
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia