जो किये थे कसूर

Raj Vig

रचनाकार- Raj Vig

विधा- कविता

अपमान किया है उसने किसी का
बेआबरू कर दिखाया है गरूर
दी है सजा उसने किसी को
जो था बिल्कुल बेकसूर ।

मिलेगा उसे इसका दण्ड
रोयेगा इक दिन हो के मजबूर
बचा नही है यहां पर कोई
पायेगा इक दिन जो किया था जरूर ।

आयेगा इक दिन वो भी राह पर
ढूंढेगा हर जगह कहां मिलता है सरूर
उतर जायेगा उसके सर से भी
अपने बड़े होने का फतूर ।

इक दिन उसका भी नशा उतरेगा
खाली हाथ गया है हर कोई हजूर
हाथ जोड़ कर प्रार्थना कर लेगा
बच जायेगा शायद उनसे जो किये थे कसूर ।।

राज विग

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Raj Vig
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