जैसे काँटा कोई चुभा सा है

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- गज़ल/गीतिका

आज की हासिल
ग़ज़ल
———-
2122 1212 22/112
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
साथ है वो मगर जुदा सा है
राज़ दिल में कोई छुपा सा है
💐💐💐💐💐💐💐💐

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
जब से देखी तुम्हारी ये आँखें
जैसे छाया कोई नशा सा है
💐💐💐💐💐💐💐💐

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
देख रखना सँभाल कर इसको
दिल मेरा .एक आइना सा है
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
अब न रखना तू कोई भी मरहम
दर्दे-दिल ही मेरा दवा सा है
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
अब्र में चाँदनी छुपी बैठी
चाँद उसपे फिदा-फिदा सा है
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
कैसे रौशन हो घर ग़रीबों का
मुद्दतों से दिया बुझा सा है
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
आप आए तो लग रहा मुझको
फूल सहरा में फिर खिला सा है
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
आह निकली हमारे इस दिल से
जैसे काँटा कोई चुभा सा है

गिरह
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
जो कभी एक थे तो फिर "प्रीतम"
दरमियां क्यूँ ये फासला सा है
💐💐💐💐💐💐💐💐💐
प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती (उ०प्र०)
17/09/2017
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

Sponsored
Views 1
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Pritam Rathaur
Posts 168
Total Views 1.7k
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia