जी लेती है जी भरकर के…मुस्कुराती सी

Dinesh Sharma

रचनाकार- Dinesh Sharma

विधा- कविता

सुबह की मस्त सुहानी हवा से
झूमते पत्तो फूलो की डाली
सूरज की पहली किरण
इठलाती सी ओस की बुँदे को
स्पर्श कर जो नाच रही
चमक रही मोती सी गुलाब की
पंखुड़ी पर पल पल जी रही
बेपरवाह हो कर वो,
एक झोंके से पल की जिंदगी मेरी मिल जायेगी
नम मिट्टी पर ये जानते हुए,
मोती सी वो नाच रही ओस की बूँद
सूरज की पहली किरण के साथ
मुस्कुराती सी पल पल,
जीने का राज जान लिया मैंने भी
उस ओस की चमकती बूँद से
जो पल भर के जिंदगी को जी लेती है,
जी भर के सूरज की पहली किरण के साथ
मुस्कुराती सी😊☺😊

^^^^दिनेश शर्मा^^^^

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Dinesh Sharma
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सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज करना प्यारे दोस्तों। ऍम कॉम , व्यापार, निवास गंगा के चरणों मे हरिद्वार।।

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