@@ जीवन संगिनी @@

अजीत कुमार तलवार

रचनाकार- अजीत कुमार तलवार "करूणाकर"

विधा- कविता

तुमको देख कर ,मुझे मुस्कुराना आ गया
जीवन में मेरे अंधकार था, उजाला आ गया
चला जा रहा था ,न जाने कौन सी डगर पर
तुमको पाकर जीवन मेरा संवरता चला गया !!

लाख कोशिश की थी, मैने अपनी राह पकडने की
पर वो धरातल न मिल सका ,जिन्दगी को मेरे
वो शायद जिन्दगी का खास ,लम्हा था मेरे लिए
जिस में तुम को मैं, पाकर सजता चला गया !!

विधि का विधान ही कुछ ऐसा था, औ मेरे सनम
एक डोर को बंधने में समां ,पास आता चला गया
हो गयी दो आत्मा ,एक दूजे के पास इस तरह
दो बिछडे हुए दिलो का समां मिलाता चला गया !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

Sponsored
Views 130
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
अजीत कुमार तलवार
Posts 420
Total Views 6.8k
शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, पूर्वज : अमृतसर से है, और वर्तमान में मेरठ से हूँ, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , EMAIL : talwarajit3@gmail.com, talwarajeet19620302@gmail.com. Whatsapp and Contact Number ::: 7599235906

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia