जीवन के दिन रात

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

भाई मेरे बन गए, तब से अतिथि समान ।
जबसे उनके हो गए, अपने अलग मकान।।

एक छोर पर ख्वाहिशें ,.. दूजे पर औकात!
जिसमे फँस कर रह गये,जीवन के दिन रात! !

आएेंगे हद मे कई, निश्चित ही कुछ यार!
किया दुश्मनों का अगर,बेनकाब रुखसार ! !
रमेश शर्मा.

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RAMESH SHARMA
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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

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