जीवन की बाजी

Raj Vig

रचनाकार- Raj Vig

विधा- कविता

पल दो पल के जीवन मे
क्या खोया, पाया मैंने
इन सब बातों को
मै भूल चुका हूं ।

कुछ वादों को, कुछ नातों को
मै तोड़ चुका हूं
जीवन की राहों को
मै अब मोड़ चुका हूं ।

जीवन की बाजी को
कहीं हार न जाऊं
इस डर को
मै जीत चुका हूं ।

उज्ज्वल होगा जीवन
अंधेरा जिसमे कभी न होगा
उस दीपक को
मै जला चुका हूं ।।

राज विग

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