जीना सीखो

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- कविता

अमन -चैनमय वीणा सीखो|
नेह- शांतिरस पीना सीखो|
ज्ञान-भाव का अनुपम संगम,
पाकर,जीवन-जीना सीखो|

उज्जवलता जीवन-प्रकाश है|
फिर क्यों मनुआ अति उदास है|
कर्म करो, पग एक बढाओ,
बिना चाल नाहीं विकास है|
जीवन कुंठाओं के घर-सा,
नहीं बने,वह चीह्ना सीखो|

ज्ञान-भाव का अनुपम संगम|
पाकर, जीवन-जीना सीखो|

जग-झंझावातों की काली,
निशा आ रही है मतवाली|
मत घबड़ाना सुहृद, समय की,
चाल बड़ी बेढंग -निराली|
इस युग की करतूतें जानो|
कुछ तो झीना- झीना सीखो|

ज्ञान -भाव का अनुपम संगम|
पाकर, जीवन-जीना सीखो|

सुजन, जागकर कदम बढ़ाओ|
आँगन में उल्लास सजाओ|
जीवन के तुम भाग्यविधाता,
जागो! उठो, न अब शरमाओ|
आगे बढ़ो, हौसला रखकर ,
समय- सूर्य को छीना सीखो|

ज्ञान-भाव का अनुपम संगम|
पाकर, जीवन-जीना सीखो|

अमन-चैनमय वीणा सीखो|
नेह-शांतिरस पीना सीखो|
ज्ञान-भाव का अनुपम संगम|
पाकर,जीवन जीना सीखो|

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376एवं 8787045243 व्हाट्सआप-9956928367

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