“जीता हूँ मैं”

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

रचनाकार- सन्दीप कुमार 'भारतीय'

विधा- कविता

हर रोज़ बिखरता हूँ टुकड़ों में
फिर भी हर टुकड़े में जीता हूँ
नशा है ज़िन्दगी के ज़ाम में
फिर भी हर रोज़ ज़ाम पीता हूँ
हर बात बेबाकी से कहनी है मुझे
रिश्तों की खातिर लब सीता हूँ
कल ही मिली थी ख़ुशी मुझे
कहने लगी मैं कल बीता हूँ
अनुभव साझा करता हूँ अपने
न मैं क़ुरान हूँ न मैं गीता हूँ |

“सन्दीप कुमार”
२७/०२/२०१७

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सन्दीप कुमार 'भारतीय'
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3 साझा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं | दो हाइकू पुस्तक है "साझा नभ का कोना" तथा "साझा संग्रह - शत हाइकुकार - साल शताब्दी" तीसरी पुस्तक तांका सदोका आधारित है "कलरव" | समय समय पर पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित होती रहती हैं |

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