जिन्दगी

Raj Vig

रचनाकार- Raj Vig

विधा- कविता

माया के चक्र मे
भ्रमित है हर इक जिन्दगी
अधूरी इच्छाओं से
ग्रसित है हर इक जिन्दगी ।

चिन्ताओं के भंवर मे
कल्पित है हर इक जिन्दगी
सुबह शाम की दौड़ से
व्यथित है हर इक जिन्दगी ।

कुछ सालों के खेल मे
सीमित है हर इक जिन्दगी
सांसों की गिनती मे
जीवित है हर इक जिन्दगी ।

किस दिशा मे जायेगी
अंकित है हर इक जिन्दगी
प्रभु के आदेश से
रचित है हर इक जिन्दगी ।।

राज विग

Sponsored
Views 79
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Raj Vig
Posts 50
Total Views 2k

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia