**जिंदगी है दो पल की**

Neelam Ji

रचनाकार- Neelam Ji

विधा- कविता

जब से जिंदगी को जाना है,
बस इतना ही पहचाना है ।
जिंदगी है दो पल की,
कभी हंसाएगी,कभी रुलाएगी ।
जब जब हंसाएगी,
दिल में उतर जाएगी ।
मगर जब भी रुलाएगी,
दिल से उतर जाएगी ।
कुछ ना कहकर भी,
बहुत कुछ कह जाएगी ।
कुछ कड़वी,कुछ मीठी,
ना बिसरने वाली,
यादें छोड़ जाएगी ।
कुछ उम्मीदें,कुछ चाहतें,
जिंदगी जीने का,
अरमान जगायेंगी ।
अपनों के साथ जिंदगी,
हर गम में मुस्कुराएगी ।
गम हो चाहे कितना भी बड़ा,
खुशियों की उम्मीद,जीना सिखाएगी ।
टूट कर बिखर न जाना,
हौले से ये कान में कह जाएगी ।
जिंदगी बुझी हुई उम्मीद को,
फिर से जगा जाएगी ।
जीवन के सफर की,
हर मुश्किल खोखली नजर आएगी ।
अगर समझ गए जिंदगी की पहेली,
जिंदगी हर हाल में गुनगुनाएगी ।
जब से जिंदगी को जाना है,
बस इतना ही पहचाना है ।

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Neelam Ji
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मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी कब ये मैंने नहीं जाना ।। तब तक अपने ना सही ... । दुनिया के ही कुछ काम आना ।।

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