जिंदगी की चार दिशाएँ

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

रचनाकार- लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

विधा- कविता

मेरे दोनों हाथ, दोनों पैर
बँट गए हैं चारों दिशाओं में
और मेरा शरीर लटक रहा है
त्रिशंकु की तरह
बीच अधर में

मुझे हर एक दिशा जान से प्यारी है
मेरे शरीर से भी ज्यादा

निर्णय नही ले पा रही हूँ मैं
चुन लूँ कौन सी दिशा
क्योंकि एक दिशा चुनने पर
जुडी रह पाऊँगी मैं
सिर्फ और सिर्फ दो ही दिशाओं से

पर मुझे तो
चारों ही दिशाएं
समान रूप से प्यारे हैं
और जुड़ीं रहना चाहती हूँ मैं
एक साथ इन सभी से

भले ही
इसके लिए मुझे
लटकना पड़े
त्रिशंकु की तरह
ताउम्र
यूँ ही

# लोधी डॉ. आशा 'अदिति' (भोपाल)

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 77
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
Posts 48
Total Views 6.8k
मध्यप्रदेश में सहायक संचालक के पद पर कार्यरत...आई आई टी रुड़की से पी एच डी की उपाधि प्राप्त...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia