” ——————————————-जाल मस्त है बुनिया ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

रचनाकार- भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

विधा- गीत

जिसको गुरु बनाओ ठग ले , लगती है ठग दुनिया !
ठगने को बेताब लगे सब , भरे पड़े हैं गुनिया !!

सरलचित्त होना कमजोरी , सम्मोहन ले डूबे !!
बाबा नेता और फरेबी , पकड़ा दे झुनझुनिया !!

रौब दाब वैभव चलता है , फिर वाणी का जलवा !
आसपास खुशबू का डेरा , जाल मस्त है बुनिया !!

जमघट लगते नेताओं के , जाल सियासी बुनते !
वोट यहां भी गये हाथ से , भक्त बने टुनटुनिया !!

लीलाओं का दौर रचाते , अपनी माया बुनते !
और यहां के इंद्रजाल में , फंस जाती हैं मुनिया !!

भक्तों की आंखों पर पट्टी , बांध रखें वे ऐसी !
कहा गुरु का लांघ सके ना , राह एसी दे चुनिया !!

नेता चुनना आसां है पर , सरल नहीं गुरु जान !
अधे कुएँ में गोते खाकर , भटक रही है दुनिया !!

बृज व्यास

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एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद साझा काव्य संग्रह प्रकाशित ! e काव्यसंग्रह "कहीं धूप कहीं छाँव" एवं "दस्तक समय की " प्रकाशित !

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