जान सके तो जान

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

साप्ताहिक आयोजन 172
शनि-रवि ( 08-09 जुलाई )
समस्यापूर्ति चरण- "जान सके तो जान"
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करता है दादागिरी, …..बेच रहा सामान !
ऐसे पापी चीन को , जान सके तो जान !!

हाथों की सब उँगलियाँ होती नहीं समान !
करती मिलकर काम पर,जान सके तो जान! !

आया खाली हाथ ही,दुनिया मे इन्सान!
ले जाएगा साथ क्या,जान सके तो जान।।

ऊँचे शिक्षण से नहीं ,..बने व्यक्ति विद्वान !
सोलह आने सत्य है..जान सके तो जान.!!

गुरु दिखलाये राह जब ,मिले नसीहत ज्ञान !
हो जाता जीवन सफल,जान सके तो जान !!

कितना भी पढ़ ले मनुज, बन जाये विद्वान।
बिना गुरू सब व्यर्थ है, जान सके तो जान।
रमेश शर्मा

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RAMESH SHARMA
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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

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