जान मिल गई

कृष्णकांत गुर्जर

रचनाकार- कृष्णकांत गुर्जर

विधा- कव्वाली

तू मिली यू मुझे जैसे जान मिल गई|
मरते हुये को इक जिंदगी मिल गई||

तू ही जीवन मेरा तू ही जान है मेरी,
आज गेरो मे अपना सा कोई मिल गया

जबसे देखा तुझे तबसे जाना तुझे,
मेरे दिलने दिलवर माना तू तुझे

इक मरते हुये को जेसे जान मिल गई
मुरझानी कली जो अब खिल गई

खुशियाँ भी मिली आबरू मिल मिल गई
दो तन मे जान सी दवा  मिल गई

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कृष्णकांत गुर्जर
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संप्रति - शिक्षक संचालक G.v.n.school dungriya मुकाम-धनोरा487661 तह़- गाडरवारा जिला-नरसिहपुर (म.प्र.) मो.7805060303
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