जान को मेरी….

तेजवीर सिंह

रचनाकार- तेजवीर सिंह "तेज"

विधा- गज़ल/गीतिका

🌺🌻🌹 ग़ज़ल 🌹🌻🌺
बह्र – 212 – 212 – 212 – 212

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जान को मेरी अब यूँ निकालो न तुम।
आज सीने से मुझको लगा लो न तुम।

गश न आए मुझे जब हो तुम रूबरू।
इस क़हर से ख़ुदारा बचा लो न तुम।

देखकर के तुम्हें देखती रह गयी।
ये नज़र थोड़ा नीचे झुका लो न तुम।

हर तरफ हर जगह है तिरा अक्स ही।
गफलते जिंदगी को सम्भालो न तुम।

रूह की घाटियों में समाते हुए।
जिंदगी की भँवर से निकालो न तुम।

कश्मकश हो गयी है मिरी जिंदगी।
ज़ख्म भरने का मल्हम निकालो न तुम।

*तेज* अहसास मुझको करें बावली।
दिल मिरा अपने दिल से मिला लो न तुम।

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© तेजवीर सिंह 'तेज'✍

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तेजवीर सिंह
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नाम - तेजवीर सिंह उपनाम - 'तेज' पिता - श्री सुखपाल सिंह माता - श्रीमती शारदा देवी शिक्षा - एम.ए.(द्वय) बी.एड. रूचि - पठन-पाठन एवम् लेखन निवास - 'जाट हाउस' कुसुम सरोवर पो. राधाकुण्ड जिला-मथुरा(उ.प्र.) सम्प्राप्ति - ब्रजभाषा साहित्य लेखन,पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन तथा जीविकोपार्जन हेतु अध्यापन कार्य।

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