जाग रहा है हिन्दुस्तान

निहारिका सिंह

रचनाकार- निहारिका सिंह

विधा- कविता

आज विदेशों में भी अपना ,
गूंज उठा जन-गण-मन गान ।
अपनाकर पुनः संस्कृति अपनी ,
जाग रहा है हिन्दुस्तान ।
सबने माना योग स्वास्थ्य का ,
पूर्णतः प्रतिपालक है ।
विश्व गुरु है अपना भारत ,
संस्कृति का संचालक है ।
छोड़ जहाँ धर्मभेद
स्वास्थ्य बन रहा अभियान ।
अपनाकर संस्कृति अपनी ,
जाग रहा है हिन्दुस्तान ।।
जहाँ पर शिक्षा के अब,
मानक बदल रहें हैं ।
शिक्षण में प्रयत्नों से ,
भविष्य सवंर रहें हैं ।
विदेशों में भी अपने देश का
बढ़ रहा मान-सम्मान ।
अपनाकर संस्कृति अपनी,
जाग रहा है हिन्दुस्तान ।।
खेतों में हरियाली लहराये ,
उन्नत किस्म के बीज मिलें ।
हर किसान मन में हर्षाये ,
ऐसा उन्हें सहयोग मिले ।
हर भूखे तक पहुँचे भोजन,
जगह -जगह गूंजे ये गान ।
अपनाकर संस्कृति अपनी ,
जाग रहा है हिन्दुस्तान ।।

निहारिका सिंह

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निहारिका सिंह
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स्नातक -लखनऊ विश्वविद्यालय(हिन्दी,समाजशास्त्र,अंग्रेजी )बी.के.टी., लखनऊ ,226202।

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