जाग युवा भारत के अब तो , ले आ वापिस देश की शान को

कृष्ण मलिक अम्बाला

रचनाकार- कृष्ण मलिक अम्बाला

विधा- कविता

हो गयी गलतियां तुझसे अतीत में बेशक,
अब तो सम्भल जा वक्त है तेरे पास
बेदाग़ जिंदगी जी भोग विलास से हटकर
सफल कर जिंदगी और बाकी बचे श्वास
बहन बेटियों की इज्जत से न खेल तू
न देख टीवी पर हवस की रेल तू
गन्दगी है बेशक हर ओर
पर खुद की वीरता को बचाना है
काम वासना और नशे से बचकर
इतिहास जिंदादिली का लौटाना है
पल भर की हवस तेरी
उम्र भर राक्षस कहलाता है
न घर में रहती इज्जत तेरी
समाज में भी कोसा जाता है
भड़कीले तन बदन खींचे बेशक
तेरी वही परीक्षा कड़ी है
नागिन बन इन्द्रियां तेरे सामने
तेरी ताकत छिनने खड़ी है
दिखा दे जोर बाजुओं का
बहन बेटियों का कर आदर सत्कार
जो न चले सादगी पर बहन तेरी
उनको बेशक दिल से उतार
पर रेप जैसे गन्दे लफ्ज
तेरे दिमाग में न आने पाएं
तेरी बाजुओं के बल के किस्से
रेप को देश से दूर भगाएं
इज्जत से खेलना नही इंसानियत
नामर्दी की निशानी है
जी ले जोश और शान से बेटे
जब तक तेरी जवानी है
नशों और वैश्या के चक्कर में भी
क्यों खुद को बर्बाद करें
आगे बढ़ तरक्की की राहों पर
देश को भी तू आबाद कर
माँ बेटी तेरी भी है ये सोच रख याद
जैसे तड़पता है तू उनके आदर सम्मान को
जाग युवा भारत के अब तो
ले आ वापिस देश की शान को

Views 93
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
कृष्ण मलिक अम्बाला
Posts 41
Total Views 7.3k
कृष्ण मलिक अम्बाला हरियाणा एवं कवि एवं शायर एवं भावी लेखक आनंदित एवं जागृत करने में प्रयासरत | 14 वर्ष की उम्र से ही लेखन का कार्य शुरू कर दिया | बचपन में हिंदी की अध्यापिका के ये कहने पर कि तुम भी कवि बन सकते हो , कविताओं के मैदान में कूद गये | अब तक आनन्द रस एवं जन जागृति की लगभग 200 रचनाएँ रच डाली हैं | पेशे से अध्यापक एवं ऑटोमोबाइल इंजिनियर हैं |

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
One comment