जाग उठो चिंगारी बनकर,आग लगा दो पानी मे

कृष्णकांत गुर्जर

रचनाकार- कृष्णकांत गुर्जर

विधा- कविता

जाग उठो चिगांरी बनकर,
आग लगा दो पानी मे|
क्यो जकड़े हो लचारी मे,
क्या कर रहे जवानी मेे||

नाग नहा रहे अनपड़ नेता,
क्यो जीते नादानी मे|
ब्याकुल बैठी सारी जनता,
लगे सरकार बनानी मे||

आजादी पा करके भी हम,
क्यो जकड़े है गुलामी मे|
जगो जगो जाग जाओ अब,
क्यो मरते खीचा तानी मे||

पुरखो ने थी जान गवाई,
भारत की आजादी मे|
तुम भी दे दो इक कुर्वानी,
मत जकड़ो इस गुलामी मे||

सरकार तो नाच नचावे
तुम क्यो मरो दिवानी मे|
क्यो जकड़े हो लचारी मे
क्यो मर रहे जवानी मे||
✍कृष्णकांत गुर्जर

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