जाग उठी है बेटी

Kavi DrPatel

रचनाकार- Kavi DrPatel

विधा- गीत

जाग उठी है बेटी देखो अपने हिंदुस्तान की ।
बात हो रही सारे जग में अब उसके सम्मान की ।

छोटी छोटी बातों हित रोती थी घर में पड़े पड़े ।
जज बन करके आज फैसले करती है वो बड़े बड़े ।
कोई ऐसा क्षेत्र नहीं जिसमें उसकी पहचान न हो ।
सिंधु और साक्षी के जैसा भारत में अनुदान न हो ।
गीतों में बन लता घोलती सरगम वो मुस्कान की ।
जाग उठी है बेटी देखो ……..

सीता सावित्री, द्रुपदी सा गौरवमय इतिहास है ।
इनके पदचिन्हों पर चलना बेटी का विश्वास है ।
शिक्षा राजनीति में भी अब बेटों से आगे निकल गयी ।
अबला बेटी को मत समझो बनी शेरनी सँभल गयी ।
छक्के छुड़ा रही मनु बनकर थामें सैन्य कमान की ।
जाग उठी है बेटी देखो ………..

बेटी पढ़ लिखकर के अब तो भगवत कथा सुनाती है ।
यज्ञ और यज्ञोपवीत भी बेटी अब करवाती है ।
कभी घरों में जो थी दुबकी वायुयान चलाती अब ।
रिक्शे से ले रेल तलक अब सरपट वो दौड़ती सब ।
हर मोर्चे पर लगा रही वो बाजी अपने जान की ।
जाग उठी है बेटी देखो ……….

चूल्हा चौका छोड़ आज शमशान तलक वो जाती है ।
अर्थी काँधे पर रखकर बेटे का फर्ज निभाती है ।
बन करके कल्पना सुनीता आसमान को नाप लिया।
स्वर्ण परी पी.टी. ऊषा बन जग में रोशन नाम किया।
आज सफलता कदम चूमती बेटी के अरमान की ।
जाग उठी है बेटी देखो ……..

मत करो भ्रूण हत्या इसकी जग में इसको आने दो ।
जगमग ये संसार करेगी बस इसको खिल जाने दो ।
म्हकायेगी जीवन बगिया ये जिस घर को जायेगी ।
अनुपम कृति है ये ईश्वर की जग को ये हर्षायेगी ।
करो हिफाज़त मिलजुल कर सब विधना के वरदान की ।

जाग उठी है बेटी देखो अपने हिन्दुस्तान की ।
बात हो रही सारे जग में उसके अब सम्मान की ।
वीर पटेल

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Kavi DrPatel
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मैं कवि डॉ. वीर पटेल नगर पंचायत ऊगू जनपद उन्नाव (उ.प्र.) स्वतन्त्र लेखन हिंदी कविता ,गीत , दोहे , छंद, मुक्तक ,गजल , द्वारा सामाजिक व ऐतिहासिक भावपूर्ण सृजन से समाज में जन जागरण करना

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