जां से बढ़कर है आन भारत की

महावीर उत्तरांचली

रचनाकार- महावीर उत्तरांचली

विधा- गज़ल/गीतिका

जां से बढ़कर है आन भारत की
कुल जमा दास्तान भारत की

सोच ज़िंदा है और ताज़ादम
नौ'जवां है कमान भारत की

देश का ही नमक मिरे भीतर
बोलता हूँ ज़बान भारत की

क़द्र करता है सबकी हिन्दोस्तां
पीढ़ियाँ हैं महान भारत की

सुर्खरू आज तक है दुनिया में
आन-बान और शान भारत की

Views 25
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
महावीर उत्तरांचली
Posts 31
Total Views 679
एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia