ज़िन्दगी कभी-कभी अजनबी सी लगती है…

Ajay Kher

रचनाकार- Ajay Kher

विधा- कविता

अपनी होकर भी, ना जाने क्यूँ….
किसी और की लगती है….
ये ज़िन्दगी कभी कभी….
हाँ…..कभी-कभी अजनबी सी लगती है…..
धड़कता तो है दिल अपने ही सीने में,
मगर, धड़कन किसी और की लगती है….
ये ज़िन्दगी कभी-कभी….
हाँ…..कभी-कभी अजनबी सी लगती है…
कभी ख्वाब लगते है हकीकत…
कभी हकीकत भी ख्वाब सी लगती है….
बन जाती है कभी, दूरियां भी नजदीकियाँ….
कभी नजदीकियाँ भी…..
मीलो की दूरियां सी लगती है…
ये ज़िन्दगी कभी-कभी….
हाँ…..कभी-कभी अजनबी सी लगती है…

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