ज़़बांं जो शाायराानाा जाानताा हैै

Salib Chandiyanvi

रचनाकार- Salib Chandiyanvi

विधा- गज़ल/गीतिका

परिन्दा ..आशियाना जानता है
फ़क़्त अपना ठिकाना जानता है

अलम बरदार है तहज़ीब नौ का
ज़बां जो शायराना ..जानता है

उसी को प्यार मिलता है जहाँ में
जो ऐबों को ..छुपाना जानता है

अभी मैं खुद से भी वाक़िफ़ नहीं हूँ
मुझे सारा…. ज़माना जानता है

उसी को ढूँढता फिरता हूँ सालिब
वो जो दिल को दुखाना जानता है

सालिब चन्दियानवी

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Salib Chandiyanvi
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मेरा नाम मुहम्मद आरिफ़ ख़ां हैं मैं जिला बुलन्दशहर के ग्राम चन्दियाना का रहने वाला हूं जाॅब के सिलसिले में भटकता हुआ हापुड आ गया और यहीं का होकर रह गया! सही सही याद नहीं पर 18/20की आयु से शायरी कर रहा हूँ ! उस्ताद तालिब मुशीरी साहब का शाग्रिद हूँ पर ज्यादा तर मैने फेस बुक से सीखा जिसमें मनोज बेताब साहब, कुंवर कुसुमेश साहब, मुख्तार तिलहरी साहब का बहुत बडा हाथ है !

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