*****ज़रा सोचिए????? रोटी का सत्य***

Neeru Mohan

रचनाकार- Neeru Mohan

विधा- कविता

क्या कहें हम किसी से ,
ये छोटी सी बात |
सबने यही कहा कि रोटी बुझाती है ,
इस भूखे पेट की आग |
मगर नहीं सोचा यह कि कौन है ?
जिसके कारण बुझती है ,
इस भूखे पेट की आग |
बीज बोता है जब एक किसान ,
धूप में बारिश में होकर परेशान |
मिलता नहीं है पूरा उसको ,
अपनी ही मेहनत का परिणाम |
गेहूँ तो सबके लिए उगाता है वह |
पर पेट भर के रोटी कभी नहीं खा पाता है वह |
क्या ? क्या ?उसके बारे में भी कभीे किसी ने सोचा है |
भूखा रहकर स्वम् कभी भूखा हमें सुलाता नहीं है |
अन्न तो पहुंच जाता है घर-घर में सबके पूर्ण |
पर उगाए अपने ही अन्न के लिए ,
हाथ पसारता है दूसरों के आगे संपूर्ण |
उस अन्न देने वाले को क्या हमने कभी याद किया है |
ईश्वर ही है वह हमारे लिए ,
जिसने अन्न हमें पेट भरने के लिए दिया है |
घर-घर में अन्न के द्वारा रोटी वह पहुँचाता है ,
जिसका सेवन करके रोज़,
कोई भूखा नहीं सो पाता है |

*****नीरू सभी कृषक भाइयों को अपने शब्दों के माध्यम से नमन करती है***** और तहे दिल से सभी देशवासियों की तरफ से उनका धन्यवाद करती है |
*****उनकी मेहनत का फल हर रोज़ रंग लाता है |**************
इस संसार में कभी भूखा न कोई सो पाता है|*******

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Neeru Mohan
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व्यवस्थापक- अस्तित्व जन्मतिथि- १-०८-१९७३ शिक्षा - एम ए - हिंदी एम ए - राजनीति शास्त्र बी एड - हिंदी , सामाजिक विज्ञान एम फिल - हिंदी साहित्य कार्य - शिक्षिका , लेखिका friends you can read my all poems on my blog (साहित्य सिंधु -गद्य / पद्य संग्रह) blogspot- myneerumohan.blogspot.com

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