जहाँ भर में

Shivkumar Bilagrami

रचनाकार- Shivkumar Bilagrami

विधा- गज़ल/गीतिका

जहां भर में अमन का ग्राफ़ नीचे जा रहा है
जिसे देखो वही तलवार खींचे जा रहा है

क़लम से काटनी थी नफ़रतों की पौध जिसको
वही अब नफ़रतों की पौध सींचे जा रहा है

हमें उपदेश देता था हमेशा अम्न के जो
वही हाकिम वो देखो आँख मीचे जा रहा है

कबूतर अम्न का है बम धमाकों से परेशां
कभी इसके कभी उसके दरीचे जा रहा है

भर आया नाव में पानी मगर नाविक है ज़िद पर
वो अँजुरी बाँध कर पानी उलीचे जा रहा है

……………..शिवकुमार बिलगरामी

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Shivkumar Bilagrami
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शिवकुमार बिलगरामी : जन्म 12 अक्टूबर : एम ए (अंग्रेज़ी ): भारतीय संसद में संपादक पद पर कार्यरत । शिवकुमार बिलगरामी आज के दौर के मशहूर शायर और गीतकार हैं। आपकी ग़ज़लें देश विदेश के कई ग़ज़ल गायकों द्वारा गाई जा रही हैं । इनका एक ग़ज़ल संग्रह नई कहकशां प्रकाशित हो चुका है।

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