** जरा दिल साफ हो ले **

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- मुक्तक

12.3.17 सन्ध्या 7.15
मुश्किलें बहुत है राहे मंजिल

मुश्किलों से दो -चार हो ले

कुछ कर्म कर पार हो ले

राहे मंजिलो में मुश्किलें बहुत

ना दुःख से रो होले- होले ।।
👍मधुप बैरागी

ज़ख्म धो लें ,होले होले रो लें

तमन्नाऐं नासूर बन अब बोलें

प्यार हरा हो लें दर्द देंगे ज़ख्म

पहले जरा दिल साफ तो हो लें।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल वर्तमान पद - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिन्दी रचनाये 9928752150
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