जय माँ सरस्वती

पूनम झा

रचनाकार- पूनम झा

विधा- गीत

हे वीणावादिनी,
हे हंसवाहिनी,
हे ब्रह्मचारिणी,
हे वागीश्वरी,
हे बुद्धिधात्री,
हे वरदायनी,
हे माँ शारदे,
कुछ ऐसा कर दे,
इस लेखनी को वर दे।
.
करूँ पुष्प अर्पण,
करूँ तेरा वंदन,
नवाऊं शीश तेरे चरण,
रचूँ कुछ रचना,
रचूँ उसमें भी नमन
हे माँ शारदे,
कुछ ऐसा कर दे,
इस लेखनी को वर दे।
.
रचे लेखनी जब
बनी रहे इसकी गरिमा,
रचे जब कोई रचना
बनी रहे रचना की गरिमा,
हे माँ शारदे
कुछ ऐसा कर दे
इस लेखनी को वर दे।
.
माँ तेरी कृपा दृष्टि हो,
ज्ञान की वृष्टि हो,
तम का नाश हो,
निर्मलता का वास हो,
जगत का उद्धार हो,
हे माँ शारदे
कुछ ऐसा कर दे
इस लेखनी को वर दे।
.
ज्ञान का प्रकाश दे,
मन में उद्गागार दे,
शब्द का भण्डार दे,
गति में निर्बाधता दे,
रचना में प्रखरता दे,
हे माँ शारदे,
कुछ ऐसा कर दे,
इस लेखनी को वर दे।
हे वरदायिनी, वर दे माँ वर दे।
@पूनम झा। कोटा, राजस्थान
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पूनम झा
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मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है। मैं ब्लॉग भी लिखती हूँ | इसका श्रेय मेरी प्यारी बेटी को जाता है । उसी ने मुझे ब्लॉग लिखने को उत्प्रेरित किया। कभी कभी पत्रिकाओं में मेरी रचना प्रकाशित होती रहती है | ब्लॉग- mannkibhasha.blogspot.com
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